Malla Mahal Almora: कुमाऊं के चंद राजाओं का भुला-बिसरा किला
Malla Mahal Almora शहर के कचहरी बाज़ार (खज़ांची मोहल्ला, पल्टन बाज़ार) में स्थित एक 16वीं सदी का राजमहल है, जिसे 1588-89 में चंद वंश के राजा रुद्र चंद ने बनवाया था। इसे Ashta Mahal (आठ कोनों वाला महल) भी कहा जाता है। और बिना किसी साइनबोर्ड के शहर की हलचल के बीच छुपी हुई खड़ी है।
अगर आप Almora घूमने जा रहे हैं और सिर्फ पहाड़ों के नज़ारे ही नहीं, बल्कि यहाँ की 300 साल से भी पुरानी राजशाही इतिहास भी जानना चाहते हैं, तो Malla Mahal एक ऐसी जगह है जहाँ ज़रूर जाना चाहिए।
Malla Mahal का इतिहास (History)
Almora शहर की स्थापना खुद 1568 में राजा कल्याण चंद ने की थी, और उससे पहले यह जगह “राजपुर” के नाम से जानी जाती थी। इसके कुछ साल बाद ही, 1588-89 में राजा रुद्र चंद — जो मुग़ल बादशाह अकबर के समकालीन थे — ने शहर के बीचोंबीच एक नया राजमहल बनवाया, जो Malla Mahal कहलाया।
समय के साथ इस महल का नियंत्रण कई बार बदला:
- 1744 — रोहिल्ला सरदार अली मोहम्मद ने कब्ज़ा किया, लेकिन पहाड़ी इलाके में ज़्यादा दिन टिक नहीं पाया और भारी कीमत लेकर महल चंद राजा को वापस कर दिया।
- 1790 — गोरखा शासकों ने चंद राजाओं को हराकर Almora पर कब्ज़ा कर लिया। करीब 25 साल तक यहाँ गोरखा राज रहा, और इस दौरान महल को Nanda Devi Fort के नाम से भी जाना जाता था।
- 1815 — Anglo-Gorkha युद्ध के बाद अंग्रेज़ों ने गोरखाओं को हराकर महल पर अधिकार कर लिया और वहीं से अपना प्रशासनिक कामकाज शुरू किया।

Ashta Mahal, Rani Mahal और परिसर की वास्तुकला
Malla Mahal कोई अकेली इमारत नहीं, बल्कि एक पूरा परिसर है जिसमें शामिल है:
- Ashta Mahal — मूल आठ-कोनों वाला राजमहल
- Rani Mahal — रानियों का निवास स्थान
- Ramshila
- एक सुरंग जो Malla Mahal से Talla Mahal तक जाती थी
पूरी इमारत लकड़ी और पत्थर से बनी है, स्थानीय “Nagar style” में। दीवारों की मोटाई और पत्थरों के आकार को देखकर कई इतिहासकार मानते हैं कि इसका कुछ हिस्सा चंद वंश से भी पहले, कत्यूरी काल का हो सकता है। अंदर जाने वाली सीढ़ियों पर कुछ पुरानी पेंटिंग्स भी देखी जा सकती हैं, जो उस दौर की कुमाऊंनी संस्कृति को दर्शाती हैं।
Malla Mahal कैसे पहुँचें (How to Reach)
| कहाँ से आना है | दूरी | ज़रिया |
|---|---|---|
| Almora Bus Stand / Mall Road | ~1-2 km | पैदल या local taxi |
| Kathgodam Railway Station | ~80 km | Taxi/bus |
| Pantnagar Airport | ~115 km | Taxi |
| Delhi | ~380 km | Road/bus/private taxi |
Malla Mahal Almora के कचहरी बाज़ार में,पल्टन बाज़ार और धारानौला के नज़दीक स्थित है — Maa Nanda Devi Mandir से भी पैदल दूरी पर।
घूमने से जुड़े कुछ ज़रूरी सलाह
- हाँ कोई प्रवेश शुल्क या औपचारिक टिकट काउंटर नहीं है।
- बाहर से इस इमारत की सुंदर वास्तुकला और अल्मोड़ा शहर का मनमोहक विहंगम दृश्य अवश्य देखें। यह स्थान एक बेहतरीन व्यू पॉइंट भी है।
- यदि यहाँ मरम्मत या नवीनीकरण का कार्य चल रहा हो, तो परिसर के कुछ हिस्से अस्थायी रूप से बंद मिल सकते हैं।
- पास ही Nanda Devi Temple और कचहरी बाज़ार की गलियों में स्थानीय कुमाऊंनी स्नैक्स (जैसे बाल मिठाई) चखना न भूलें।
FAQs — Malla Mahal Almora
Malla Mahal Almora किसने बनवाया था?
Malla Mahal Almora को 1588-89 में चंद वंश के राजा रुद्र चंद ने बनवाया था। वे अकबर के समकालीन थे और उन्होंने Almora शहर के बीचोंबीच यह राजमहल अपने शासन के केंद्र के रूप में बनवाया, जो बाद में गोरखा और अंग्रेज़ शासकों के अधिकार में भी रहा।
Malla Mahal को Ashta Mahal क्यों कहा जाता है?
Malla Mahal को Ashta Mahal इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसका मूल ढांचा अष्टकोणीय (आठ-कोनों वाला) बनाया गया था। आज भी इस ऐतिहासिक धरोहर को ‘मल्ला महल’ के साथ-साथ ‘अष्टकोणीय महल’ के नाम से भी जाना जाता है। स्थानीय लोगों और ऐतिहासिक अभिलेखों में इस नाम का उल्लेख आज भी देखने को मिलता है।
Almora से Malla Mahal की दूरी कितनी है?
Malla Mahal, Almora के कचहरी बाज़ार/Paltan Bazar इलाके में, मुख्य बाज़ार से सिर्फ 1-2 km की दूरी पर स्थित है, जहाँ पैदल या local taxi से आसानी से पहुँचा जा सकता है।
Malla Mahal का संबंध Nanda Devi Fort से क्या है?
1790 में जब गोरखा शासकों ने Almora पर कब्ज़ा किया, तब इस महल को करीब 25 साल तक Nanda Devi Fort के नाम से जाना गया। बाद में 1815 में अंग्रेज़ों के आने के बाद इसका नाम वापस Malla Mahal हो गया ।
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